रोहतक पीजीआई में अजब-गजब केस, मरीज के पेट से निकले पेंच, कांच और ब्लेड, डॉक्टर भी हैरान

रोहतक | PUBLISHED BY: GARIMA-TIMES | PUBLISHED ON: 14 MAY, 2022

मरीज का एक्सरे

मरीज का एक्सरे

रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ प्रवीण मल्होत्रा व उनकी टीम ने एक गंभीर हालत में पहुंच चुके मरीज की जान बचा कर साबित कर दिया कि यूं ही चिकित्सक को भगवान का दर्जा नहीं दिया जाता। गैस्ट्रोएंटरोलाजी विभाग में इलाज के उपरांत मरीज अब  स्वस्थ है और अस्पताल से जा चुका है। मरीज ने डाक्टर प्रवीण मल्होत्रा व उनकी टीम का तहे दिल से धन्यवाद व्यक्त किया।

मरीज की एंडोस्कोपी के दौरान लिया गया फोटो

मरीज की एंडोस्कोपी के दौरान लिया गया फोटो

डा प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि एक 26 वर्षीय पुरुष की एंडोस्कोपी के माध्यम से मरीज का जीवन और सर्जरी दोनों बचाए गए। उन्होंने बताया कि मरीज ने कुछ लोहे की तेज धार वाली कीले ,पेेच, पत्ती एवं कांच के टुकड़े निगल लिए थे। जिसके चलते उसे पेट में दर्द होने लगा व उसे उल्टियां आने लग गई, इस मरीज ने क्यों यह चीजें निगली इसका कारण उसने स्पष्ट नहीं किया। उन्होंने बताया कि इस मरीज को पहले उसके जिले के अस्पताल में दिखाया गया और जब उसके पेट का एक्सरे किया गया तो चिकित्सक उसके पेट में नुकीली चीजें देखकर हैरान रह गए और उसे तुरंत पीजीआईएमएस में रेफर किया गया।

मरीज के पेट से निकाले गए लोहे व कांच के टुकड़े ।मरीज के पेट से निकाले गए लोहे व कांच के टुकड़े ।

डा. मल्होत्रा ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एंडोस्कोपी की गई तो उसमें पता चला कि मरीज के पेट में लोहे की कील ,पेच, पत्ती एवं कांच के टुकड़े थे और उसमें से कुछ पेट में धंसना शुरू कर चुके थे। उन्होंने बताया कि क्योंकि मरीज को इन्हें निगले लगभग 10 दिन बीत चुके थे और यदि इन्हें ना निकाला जाता तो यह कीले पेट व आंत को फाड़ सकते थे ,जिससे मरीज की इंफेक्शन से जान जा सकती थी। डा. प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि ऐसे में उनके सामने मरीज की जान बचाने के लिए सिर्फ एक तरीका था कि जल्द से जल्द एंडोस्कोपी के माध्यम से इन्हें बाहर निकाला जाए।

डॉक्टर प्रवीण मल्होत्रा।डॉक्टर प्रवीण मल्होत्रा।

उन्होंने बताया कि इस मरीज के पेट में दबी हुई कील ,पेच व पत्ती और कांच को उन्होंने करीब 20 मिनट की एंडोस्कोपी सर्जरी से सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया। डॉ मल्होत्रा ने बताया कि सबसे बड़ा डर एंडोस्कोपी दौरान यह था कि तेज धार चीजों को एंडोस्कोपी द्वारा निकालने में उस स्तिथि में होता है जब उन्हें खाने की पाइप के निचले और ऊपरी हिस्से से गुजरना होता है, क्योंकि यह दो जगह बहुत तंग होती हैं और निकालते वक्त यदि छोटी सी चूक से भी खाने की पाइप फट जाती है तो मरीज की हालत गंभीर हो सकती है।

डाक्टर मल्होत्रा ने बताया कि पीजीआईएमएस प्रशासन द्वारा ही एंडोस्कोपी की सुविधा उनके विभाग में शुरू की गई जिसके माध्यम से आज मरीजों को छल्ले डालना, गलू इंजेक्शन लगाना, फटे हुए अल्सर पर टांके लगाना, खाने की पाइप के तंग रास्ते को खोलना, कलोनोस्कोपी व फाइब्रोस्कैन सहित कई सुविधाएं निशुल्क प्रदान की जा रही हैं और अभी तक इस विभाग में मरीजों की 36500 एंडोस्कोपी निशुल्क बिना किसी वेटिंग के की जा चुकी हैं, जिसका श्रेय वे कुलपति डॉ अनीता सक्सेना, कुलसचिव डॉ एचके अग्रवाल व निदेशक डॉ एसएस लोहचब को देते हैं ,जिन्होंने उन्हें यह नवीनतम मशीनें मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध करवाई हुई है। 

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