बिरयानी के ठेले से कमा रहे पैसे, करोड़ों रेस्टोरेंट के मालिक

मध्य प्रदेश | PUBLISHED BY: | PUBLISHED ON: 27 JUL, 2021

हम में से बहुत से लोग है जो घर की मजबूरियों के कारण पढ़ाई जारी नहीं करते फिर चाहे उनके अंदर पढ़ाई के प्रती  कितनी भी लगन क्यों ना हो. लेकिन बहुत से लोग ऐसे भी लोग है जो मजबूरियों को अपनी ताकत बना लेते है औऱ उन्हें ही ज़िन्दगी का असली सिकंदर कहा जाता है. आज की कहानी में बात करेंगे ऐसे ही शख़्स की. जिन्होने बचपन में आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा और घर चलाने के घर से बाहर निकलना पड़ा. लेकिन घर संभालने के चक्कर में उसकी ज़िन्दगी कई बार डगमगई पर उन्होने ने  हार नहीं मानी और आज वह कामयाबी की नई मिसाल बन कर खड़ा हो गये है. नाम है आसिफ अहमद.


कौन है आसिफ अहमद 
आसिफ अहमद चेन्नई  के पल्लवरम के मध्यम वर्गीय परिवार के रहने वाले है. बचपन से ही संघर्षों का सफ़र शुरू हो गया था. पिता को नौकरी से सस्पेंड कर दिया गया. जिसकी वजह से उनके परिवार की हालत और ज़्यादा खराब होई. इसे देखते हुए आसिफ अहमद ने 12 साल की उम्र में ही काम करना शुरू किया. वह इस उम्र में अख़बार डालने का काम करने लगे और साथ ही साथ किताबें बेचकर भी कुछ आमदनी कर लेते थे.


 चमड़े के कारोबार से शुरुवात
आसिफ को पैसा कमाना था तो वो नए-नए प्रयोग करते रहते थे. उन्होंने 14 साल की उम्र में ही चमड़े के जूते का कारोबार शुरू किया और कारोबार सही चल पड़ा. शुरुवात में उन्हें करीब एक लाख की आमदनी प्राप्त हुइ. लेकिन अचानक से चमड़े का कारोबार मंदा पड़ गया. जिसके चलते उनका बना बनाया कारोबार ठप होने की कगार पर पहुँच गया.
बिरयानी बनाना शुरु किया
चमड़े के जूते का कारोबार बंद होने के बाद उन्होंने अपने बचपन के शौक को पूरा करने की सोची. वह बचपन से ही खाना बनाने के बेहद शौकीन थे. उनहोने विवाह शादियों और स्थानीय कार्यक्रमों में बिरयानी का काम शुरु किया. लेकिन स्थाई रोजगार की चाहत ने आसिफ से ये नौकरी भी छीन ली.
गरीबी की मार 
एक दिन आसिफ को कोई नौकरी लगवाने वाला एजेंट मिला. जिसने आसिफ को कहा कि वह 35 हज़ार रुपए में नौकरी लगवाता है. आसिफ उसके लालच में आ गए और पैसों का जुगाड़ कर लिया. एजेंट ने आसिफ से पैसे लिए और वह गायब हो गया. आसिफ यहाँ से भी धोखा खाकर घर वापिस आ गए. 
फिर लगाया ठेला
हर जगह से धोखा खाने के बाद आसिफ ने घर आकर ठेला लगाने की सोची. इस बार वह किसी के साथ काम ना करके ख़ुद की चार हज़ार की बैंक सेविंग से घर के पास ही बिरयानी का ठेला लगाने लगे. उनकी बिरयानी को लोगों ने ख़ूब पसंद किया और तीन चार महीने बाद ही उनकी बिक्री रोजाना 10 से 15 किलो तक होने लगी. बिक्री जैसे-जैसे बढ़ती गई उनकी कमाई भी बढ़ने लगी. औऱ उन्होंने कुछ बड़ा करने का प्लान तैयार किया.
 ‘आसिफ बिरयानी’  ठेले का नाम
साल 2002 में पास की ही एक दुकान को किराए पर ली और नाम  ‘आसिफ बिरयानी’  रखा. उन्होंने इस दुकान के तीन साल बीतने पर तीस लोगों को नौकरी पर रखा. साथ ही पास में ही 1500 वर्ग फुट में बड़ा आउटलेट खोला. मकसद साफ़ था कि अब अपने काम को बड़ा रूप देना है. उन्होंने बैंक से लोन लेकर आठ नए रेस्टोरेंट खोले. ताकि काम को और आगे बढाया जाएं. आज आसिफ के बिरयानी का कारोबार 40 करोड़ के पार जा चुका है.

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