सावधान! अस्पताल में हो रही है शवों की अदला-बदली

21 Jul, 2020 | Punjab National | garima times

अमृतसर। श्री गुरु नानक देव जी अस्पताल में जिंदगियों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। दो मरीजों के शवों की अदला-बदली का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि सोमवार को एक विवादास्पद खुलासा हुआ। जिस संक्रमित बुजुर्ग प्रीतम सिंह निवासी मुकेरियां के शव की अदला-बदली हुई थी, उसे डॉक्टरों ने 11 जुलाई को ही मृत बता दिया था। आइसोलेशन वार्ड में भर्ती प्रीतम सिंह के कोरोना संक्रमित बेटे को 13 जुलाई को बताया गया कि उनके पिता की 11 जुलाई को मौत हो गई है।

दिलबीर सिंह ने वार्ड के बाहर खड़े अपने भाई गुरचरणजीत सिंह को इसकी सूचना दी। रोते-बिलखते परिजन जब आईसीयू वार्ड में पहुंचे तो प्रीतम सिंह बेड पर आराम से बैठे हुए मिले। इसके बाद परिजनों और डॉक्टरों के बीच काफी विवाद हुआ। इस विवाद के बाद डॉक्टरों ने कोरोना का इलाज करवा रहे दिलबीर सिंह (59) को डिस्चार्ज कर दिया था। दिलबीर को डिस्चार्ज करते समय उसका कोई भी टेस्ट नहीं करवाया गया। डॉक्टरों ने परिवारजनों को आईसीयू वार्ड में दाखिल अपने बुजुर्ग को देखने से भी रोका। 
वहीं 18 जुलाई दोपहर बारह बजे अस्पताल प्रबंधन ने प्रीतम सिंह की बेटी को फोन कर बताया कि 17 जुलाई को प्रीतम सिंह की मौत हो गई। 18 जुलाई को उनका शव मुकेरियां पहुंचा। श्मशानघाट में चिता पर शव देखकर परिजनों को शंका हुई। बुजुर्ग काफी सेहतमंद थे, जबकि शव काफी छोटा व हल्का था। परिजनों ने जब शव का चेहरा देखा तो पता चला कि वह महिला का था।

अस्पताल के डॉक्टरों और प्रबंधकों द्वारा बुजुर्ग के साथ की गई इस लापरवाही के विरुद्ध दिलबीर सिंह ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। अदालत ने याचिका को स्वीकार कर मामले की सुनवाई की तारीख 22 जुलाई निर्धारित की है। याचिकाकर्ता ने इस मामले में चीफ सेक्रेटरी पंजाब, निदेशक स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग, सिविल सर्जन अमृतसर, जीएनडीएच के एमएस और पुलिस कमिश्नर अमृतसर को वादी बनाया है। पीड़ित के वकील राजीव मल्होत्रा ने कहा कि प्रीतम सिंह की मौत 17 तारीख हो गई थी, डॉक्टरों ने इसकी जानकारी 12 घंटे बाद क्यों दी, यह जांच का विषय है।  

वकील राजीव मल्होत्रा और सतिंदर सिंह बोपाराय ने बताया कि इलाज के दौरान जिस महिला की मौत हुई थी, वह कोरोना संक्रमित नहीं बल्कि कैंसर पीड़ित थी। उसके शव को उसी तरह कवर कर भेजा गया, जैसे कोरोना मरीज की मौत के बाद किया जाता है। पदमा के परिजनों ने इस बात की शिकायत पुलिस से कर कार्रवाई की मांग की लेकिन पुलिस ने कोई भी कार्रवाई नहीं की।  

वकील राजीव मल्होत्रा के अनुसार परिजनों का कहना है कि बुजुर्ग जिंदा हैं। उन्होंने दावा किया कि मृतक महिला के परिजनों ने जिस व्यक्ति का संस्कार किया है वह प्रीतम सिंह का नहीं है, क्योंकि महिला कोरोना संक्रमित नहीं थी। इसके बावजूद उसके शव को पैक कर भेजना कई शंकाएं खड़ी करता है। अंतिम संस्कार करते समय महिला के परिजनों को उसके अंतिम दर्शन क्यों नहीं करने दिए गए। इससे स्पष्ट है कि प्रीतम सिंह का नहीं किसी अन्य के शव का संस्कार किया गया है ।     

सरकारी मेडिकल कॉलेज श्री गुरुनानक देव जी अस्पताल के प्रिंसिपल  डॉ. राजीव देवगन ने कहा कि यह मानवीय त्रुटि है। शवों की अदला-बदली नहीं होनी चाहिए थी। वैसे हम आईसीएमआर की हर गाइडलाइन का पालन कर रहे हैं। इस मामले में चूक हुई है, जिसकी न्यायिक जांच प्रशासन द्वारा करवाई जा रही है। हम अपने स्तर पर भी खोजबीन कर रहे है। भविष्य में कोरोना संक्रमण ग्रस्त व्यक्ति का शव बॉडी मैनेजमेंट के आधार पर भेजा जाएगा।