रोहतक के 6 दोस्तों ने बधिर बच्चों के लिए उठाया सराहनीय कदम, अपने जेबखर्च से करवाई सबसे महंगी सर्जरी

14 Oct, 2021 | रोहतक | garima times

रोहतक। जरूरतमंद की सहायता व सहयोग करना समाज के हर वर्ग का दायित्व बनता है। इसके लिए हर वर्ग को निस्वार्थ भाव से आगे आना चाहिए। 6 दोस्तों के एक ग्रुप ने जरूरतमंदों की सहायता करने के लिए ऐसा कदम उठाया है कि उनकी जितनी प्रशसा की जाए कम है। दरअसल दोस्तों का ये ग्रुप अपने जेबखर्च से ऐसे बच्चों का इलाज करवा रहा है जो जन्म से बधिर होते हैं मतलब सुन नहीं सकते। अपनी जेबखर्च से वे बच्चों को सबसे महंगी सर्जरी करवाकर सुनने का तोहफा दे रहे हैं। वे जन्म से बधिर बच्चों का कॉकलियर इंप्लांट सर्जरी करवा रहे हैं। 

इन दोस्तों ने मिलकर एक ग्रुप तैयार किया है जिस में उनका मकसद जन्मजात बहरे बच्चों के कानों तक आवाज पहुंचाना है। इन 6 दोस्तों में डॉ. भूषण कथूरिया, एडवोकेट राकेश सपड़ा, डॉ. राकेश कोच, कुलवंत जैन, राजेंद्र बतरा, राजकुमार कपूर शामिल हैं। ईएनटी एवं ऑन्कोसर्जन डॉ. भूषण कथूरिया बताते हैं कि फतेहाबाद से 5 साल की बच्ची को लेकर उसके परिजन मेरे पास आए। बच्ची सुन नहीं पाती थी। परिजनों के पास इलाज के पैसे नहीं थे। पहली बार इसी ऑपरेशन से मदद का आइडिया आया और दोस्तों काे सहयोग करने के लिए कहा। दोस्तों से मिली मदद से पैसा जुटाकर इंप्लांट खरीदा और फिर सर्जरी और दवाओं का खर्च भी मरीज से नहीं लिया। उन्होंने आगे भी इस आइडिया को जारी रखने काे कहा। इसके बाद से सिलसिला जारी है।

इसके बाद कुरुक्षेत्र से 4 साल की बच्ची की सर्जरी का खर्च वहन किया। फिर हिसार से तीन साल की बच्ची का कॉकलियर इंप्लांट का ऑपरेशन करवाया। अभी कुछ समय पहले रोहतक केे 4 साल के बच्चे का इलाज करवाया तथा एक 14 साल के बच्चे का भी ऑपरेशन करवाया गया। दरअसल लोगों में अभी इस इलाज को लेकर अधिक जागरूकता नहीं है। कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी ने मूक-बधिर बच्चों को आवाज का अहसास करवाया है। ऐसे बच्चे भी अब आवाज को पहचान सकते हैं, सिर्फ इस छोटी सी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से।

चिकित्सा विज्ञान ने इतनी उन्नति कर ली है कि अगर छोटी उम्र में ही बच्चों की इस अक्षमता का पता चल जाता है, तो इसका उपचार संभव हो सकता है। इस बीमारी का पता लगाने के लिए एक जांच की जाती है, जिसे ध्वनि उत्सर्जन जांच कहा जाता है। इस जांच से बच्चों की सुनने की क्षमता का पता चलता है। अगर जांच में यह बहरेपन की समस्या सामने आती है तो कॉकलियर इम्पलांट सर्जरी के माध्यम से इस समस्या से मुक्ति दिलाई जा सकती है। अब ऐसे बच्चों के लिए यह नई तकनीक, नए जीवन की तरह है। अगर आप इस सर्जरी के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं तो आप सीधा 7015375183, 7015671278 नंबर पर बात कर सकते हैं। आप किसी बच्चे को सुनने में मदद भी कर सकते हैं। 

क्या होता है कॉकलियर इम्पलांट

कॉकलियर इम्प्लांट एक छोटा इलेक्ट्रोनिक डिवाइस होता है जो व्यक्ति को आवाज को महसूस करने में मदद करता है। यह उन लोगों के काम आता है जिनकी श्रवण क्षमता बहुत कम है या फिर जिनमें बहरेपन की समस्या पाई जाती है। इस डिवाइस में मुख्यरूप से दो हिस्से होते हैं। पहला हिस्सा एक माइक्रोफोन होता है, जो वातावरण से ध्वनि को प्राप्त करता है, यह कान के बाहरी हिस्से में पीछे की तरफ लगाया जाता है। इस डिवाइस के दूसरे हिस्से को सर्जरी की मदद से कान में अंदर लगाया जाता है जो इस ध्वनि को व्यक्ति को महसूस करवाने में मदद करता है।

कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी के पश्चात दो तीन वर्ष तक स्पीच थैरेपी करवायी जाने से बच्चे में बोलने की क्षमता विकसित हो जाती है। इससे बच्चा बोलने एवं सुनने में सक्षम हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों में कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी के परिणाम आशाजनक रहते हैं। यह सर्जरी फिलहाल काफी महंगी है। कानों की सर्जरी के मामले में सबसे महंगा इलाज कॉकलियर इंप्लांट का ही है। कॉकलियर इंप्लांट ही 5 से 15 लाख रुपए तक का आता  है। इस सर्जरी में एक छोटी-सी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस कान में लगाई जाती है। खर्च के अलावा मानसिक व शारीरिक पीड़ा भी झेलनी पड़ती है।