जातीय विवाद में उलझा हरियाणा का यह गांव, बहिष्कारित दलितों के पक्ष में आया पूरा समाज ,राजनैतिक पार्टियां भी सक्रिय

15 Oct, 2021 | हरियाणा | arya

जींद। हरियाणा में अभी भी जात पात के मामले देखने को मिल रहें है। दुनियां कहां से कहां पहुंच गई है लेकिन हरियाणा में अभी भी जात पात के मामले थमने का नाम नहीं ले रहें है। और न ही आवाज उठाने पर अनुसूचित जाति के परिवारों के बहिष्कार करने का सिलसिला थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है। हालांकि ये कोई पहली बार नहीं हुआ है जब  अनुसूचित जाति के परिवारों को बहिष्कार का सामना करना पड़ा हो। पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके है जब आवाज उठाने की गुस्ताखी करने का खामियाजा अनुसूचित जाति के परिवारों को भुगतना पड़ता है। दरअसल अब ऐसा ही मामला जींद जिले के  के छात्तर गांव से सामने आया है। जहां पर 150 अनुसूचित जाति के परिवारों को बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है। खाने पीने से लेकर दवा दारू तक के लिए ये परिवार मौताज होते हुए नजर आ रहें है। 

हालांकि जिले के छात्तर गांव में अनुसूचित जाति के परिवारों के बहिष्कार की सूचनाओं के बीच प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव में दस्तक दी है। उधर, बसपा प्रतिनिधिमंडल भी पीड़ितों से मिलने पहुंचा है। हालांकि जिला प्रशासन अभी यह मान ही नहीं रहा है कि किसी का सामाजिक बहिष्कार हुआ है। फिर भी मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। इस मामले में जिलेभर में अनुसूचित जातिगत व बसपा से जुड़े संगठन लामबद्ध हो रहे हैं। मामले को लेकर वे 16 अक्टूबर को जिला मुख्यालय पर डीसी कार्यालय का घेराव करेंगे। इसके लिए भीड़ जुटाने के लिए लोगों को न्यौता दिया जा रहा है। बुधवार देर शाम उचाना के एसडीएम राजेश कोथ व डीएसपी जितेंद्र सिंह ने छात्तर गांव का दौरा भी किया और सभी जातियों के मोज़िज़ लोगों की बैठक भी ली। 

बता दें कि छात्तर गांव में सामाजिक बहिष्कार की कथित घटना के बाद उचाना हल्के के ही गांव खापड में चोरी का शक जाहिर करते हुए एक अनुसूचित जाति के अबोध बालक की पिटाई के मामले में भी रोष है। अबोध बालक की पिटाई की वीडियो वायरल होने के बाद उचाना थाना में आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नही की गई। उल्टा आरोप है कि दबंगों द्वारा अनुसूचित जाति के परिवारों पर केस वापिस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। यहां भी एक तरह से दलित परिवारों के सामाजिक बहिष्कार किया हुआ है। 16 अक्टूबर को जींद में होने वाले प्रदर्शन में खापड गांव की घटना को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। तो वहीं सामाजिक बहिष्कार जैसी सूचना मिलने पर बहुजन समाज पार्टी का पांच सदस्य प्रतिनिधि मंडल गुरुवार को छात्तर गांव में पंहुचा और मामले की जानकारी लेकर निंदा की। प्रतिनिधिमंडल में बसपा के जींद प्रभारी अनिल रंगा, बनारसी दास, राजेश करसिन्धु, सत्यवान अलीपुरा प्रमुख रूप से शामिल रहे। 

इस प्रतिनिधिमंडल ने गांव में घटनाक्रम की कड़ी दर कड़ी जानकारी ली। बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बसपा नेता राजेश करसिन्धु ने कहा कि इस घटना की जितनी निंदा की जाए कम है। बसपा पीड़ितों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी दबंगों के दबाव में पुलिस नहीं कर रही है। इस मामले में न्याय पाने के लिए 16 अक्टूबर को जींद में डीसी कार्यालय का घेराव किया जाएगा। बता दें कि वीरवार को नरवाना की समाज कल्याण अधिकारी संतरो देवी ने गांव का दौरा किया और उन पीड़ितों से बातचीत की जिनकी सामाजिक बहिष्कार की बात की जा रही है। उनकी टीम ने वे साक्ष्य भी जुटाए जिनमे कहा गया है कि अनुसूचित जाति के परिवारों को फल, दूध, दवाएं व खेतों में जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि अभी उन्होंने इस मामले में पूरी तरह से टिप्पणी करने से मना कर दिया, लेकिन यह जरूर कहा की जांच जारी है।