रोहतक में डेंगू मरीजों को सरकारी से ज्यादा प्राइवेट अस्पतालों पर भरोसा, प्लेटनेट्स के नाम पर हो रही जेब ढीली

16 Oct, 2021 | रोहतक | garima times

रोहतक। जिले में डेंगू का प्रकोप लगातर बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को भी जिले में डेंगू के छह नए केस मिलने से मरीजों की संख्या बढ़कर 63 हो गई है। डेंगू होने पर लोग घबरा कर निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। प्लेटलेटस कम होने पर अस्पतालों की ओर से मोटा बिल बनाया जाता है जिससे मरीजों की जेब कट रही है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से रेट लिस्ट जारी की गई है, लेकिन अभी लोग जागरूक नहीं है और घबराहट में जेब ढीली करवा रहे हैं।  

खास बात यह है कि जिले में इतने मरीज होने के बावजूद भी सामान्य अस्पताल में एक भी मरीज भर्ती नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से श्हर की दो कालोनियों को हाई रिस्क जोन घोषित किया गया है। नेहरू कालोनी व प्रेम नगर में 13 से अधिक केस आ चुके हैं। जिसकी वजह से यहां पर हर रोज एंटी लारवा एक्टिविटी करवाई जा रही है। लोगों की लापरवाही का आलम यह है कि यहां के 70 घरों में बीते कल भी लारवा पाया गया है।

टीम ने लोगों को दोबारा लारवा मिलने पर नगर निगम की ओर से चालान काटे जाने की चेतावनी दी। वहीं, निजी अस्पतालों के अलावा पीजीआई, सिविल अस्पताल व शहर के निजी अस्पतालों में डेंगू बुखार पीड़ित मरीजों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। पीजीआई के इमरजेंसी विभाग में ड्यूटी पर मौजूद हेल्थ केयर वर्कर्स बुखार पीड़ित मरीजों का एलाइजा टेस्ट की बजाय बाहर से रैपिड किट मंगवाकर डेंगू की जांच कर रहे हैं। जबकि अस्पताल में रैपिड किट में आने वाली रिपोर्ट प्रमाणिक नहीं मानी जाती है। मरीजों को बाहर से 150 रुपए तक में रैपिड किट खरीदनी पड़ रही है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ईश्वर सिंह ने मरीजों का एलाइजा टेस्ट किए जाने का दावा किया है।

शहर निवासी राजेश गोयल ने बताया कि वो बुखार पीड़ित महिला रिश्तेदार को लेकर पीजीआई के इमरजेंसी विभाग में इलाज के लिए गए थे। ऑन ड्यूटी उपस्थित चिकित्सक ने डेंगू जांच के लिए रजिस्ट्रेशन कार्ड पर लिख दिया। हेल्थ केयर वर्कर ने रैपिड किट बाहर से मंगाकर टेस्ट किया, रिपोर्ट निगेटिव आई। उन्होंने कहा कि डेंगू और मलेरिया के सीजन में पीजीआई में टेस्टिंग किट नहीं है। यहां तक की मरीजों से मल्टी विटामिन इंजेक्शन भी बाहर से मंगाए जा रहे हैं। इससे मरीज परेशान हैं।

लाखनमाजरा निवासी युवक अमन डेंगू की चपेट में आ गया है। युवक ने बताया कि वो तेज बुखार और शरीर में दर्द से पीड़ित है। उसकी बॉडी में प्लेटलेट्स घटकर 60 हजार तक पहुंच गई। पीजीआई की इमरजेंसी में इलाज कराने पहुंचे। यहां पर चिकित्सक ने टेस्ट करने के बाद कार्ड पर दवाएं लिखकर घर जाने के लिए कह दिया। अमन ने बताया कि तबियत ज्यादा खराब होने से वो वहीं पर एडमिट होना चाहता था लेकिन उसे वापस लाखनमाजरा जाने के लिए कह दिया। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ईश्वर सिंह ने कहा कि पीजीआई की इमरजेंसी में आने वाले डेंगू संदिग्ध मरीजों की जांच लैब में एलाइजा किट से ही की जाती है। मरीजों की स्क्रीनिंग के लिए रैपिड किट मंगाई जाती होगी। लेकिन डेंगू पॉजिटिव रिपोर्ट एलाइजा किट टेस्ट से मान्य होती है। इसलिए डेंगू-मलेरिया जांच जरूरी है।

वहीँ  डेंगू व मलेरिया को लेकर स्वास्थ्य विभाग संजीदगी दिखा रहा है। शहर की रामलीला के दौरान भी उन्होंने विशेष काउंटर लगाकर लोगों को जागरुक किया था। यहां पर लोगों से अपील की गई कि अगर उनके क्षेत्र में भी टीम ने निरीक्षण नहीं किया है तो वे यहां पर जानकारी दर्ज करवा सकते हैं। जानकारी दर्ज करवाने के दो दिन में टीम वहां का निरीक्षण करेगी।सिविल सर्जन डा. जेएस पुनिया और उप सिविल सर्जन डा. अनुपमा मित्तल के निर्देशन में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में एंटी लारवा अभियान चलाया जा रहा है।

शुक्रवार को अटायल, नौनंद, घरौंठी, जसिया, रिटौली और जनता कालोनी में डेंगू का एक-एक मरीज मिला। उप सिविल सर्जन ने बताया कि लोगों को जागरूक होना होगा। कूलर और घरों के आसपास इकट्ठा होने वाले पानी और गंदगी में डेंगू के मच्छर पनपते हैं। ऐसे में अपने आसपास पानी इकट्ठा ना होने दें। पिछले साल जिले में डेंगू के 50 मरीज सामने आए थे, लेकिन जिस तरीके से अब केस बढ़ रहे हैं वह चिताजनक है। डेंगू के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डाक्टर से संपर्क करें, जिससे परिवार के अन्य सदस्य उसकी चपेट में ना आए।