घर फूंक थियेटर फेस्टिवल में हुआ दो नाटकों "संबोधन" और "ज़हर" का मंचन

रोहतक | PUBLISHED BY: ADMIN | PUBLISHED ON: 29 NOV, 2021

रिश्ते मानवीय संबंधों का आधार हैं, सिर्फ संबोधन नहीं। यह संदेश आज सप्तक रंगमंडल, पठानिया वर्ड कैंपस एवं सोसर्ग ग्रुप रोहतक द्वारा आयोजित घर फूंक संडे थिएटर फेस्टिवल में अनुकृति रंगमंडल कानपुर के कलाकारों ने यहां मंचित नाटक संबोधन में बहुत ही प्रभावशाली ढंग से दिया।
वैवाहिक संबंधों में पति पत्नी के बीच छोटे छोटे मतभेद, पर्सनल इगो किस तरह अलगाव की वजह बनते हैं। संबंधों में बिखराव की सजा बच्चों को सहनी पड़ती है। रिश्तों का महज संबोधन में बंध जाना दुर्भाग्य है। संबोधन ह्रदय के अंतस से जुड़ी भावना है, जिसके लिए मनुष्य अपने जीवन को समर्पित करता है, उस एक आवाज के लिए जिसे संबोधन कहते हैं। बीस वर्ष की एक बेटी अपने पिता को ना सिर्फ तलाशती  है बल्कि उसके मन में झांकना भी चाहती हैं कि  ऐसी क्या वजह रही होगी जिसके चलते बीस वर्ष पहले उसके पिता ने उसकी माँ को छोड़ दिया था,पिता के किए सवालों में वह उन जवाबों  को पा जाती है जिसे उसकी माँ सारे संबोधनों में जीवन भर तलाशती रही थी। नाटक में इस समस्या का रेखांकन किया गया।

कास्ट्यूम, लुक बदल कर एक ही महिला कलाकार अंकिता शुक्ला ने पत्नी, बेटी और दीपक राज राही ने पति व पिता की भूमिका बखूबी निभायी। मंच व्यवस्था दिलीप सिंह, प्रकाश नरेन्द्र सिंह व संगीत शिवेन्द्र त्रिवेदी का रहा। सुनील राज के इस नाटक का निर्देशन डा. ओमेन्द्र कुमार ने किया।
घर फूंक संडे थिएटर फेस्टिवल में दूसरा नाटक ज़हर था। नाटक प्रेम विवाह करने वाले युगल के वास्तविक जीवन में आने वाली जटिलताओं को दिखाता है।


किस प्रकार एक व्यक्ति अपने जीवन में एक मुकाम हासिल करने के लिये संघर्ष करता है परन्तु पारिवारिक जीवन की कटुताओं एवं अपने दो बच्चों को खो देने के कारण इतना निराश हो जाता है कि अपनी पत्नी की हत्या करने को तैयार हो जाता है।
व्यक्ति इन्टरनेट पर खोजबीन करके एक केमिस्ट के पास विशेष जहर खरीदने जाता है। कैमिस्ट बातचीत में उससे उगलवा लेता है कि वो अपनी पत्नी को मारने के लिये ज़हर खरीदना चाहता है।
केमिस्ट बहरा है, जिससे नाटक में हास्य का पुट बराबर बना रहता है। "मैं ज़हर का सौदागर हूँ, मगर आदमी को नहीं आदमी के अंदर के ज़हर को मारने की कीमत लेता हूँ" जैसे संवाद दर्शकों को बांधने में सफल रहे।

महेंद्र धुरिया व प्रवीन अरोड़ा का अभिनय बेहतरीन रहा। मंच व्यवस्था नरेन्द्र सिंह, शिवेन्द्र त्रिवेदी, दिलीप सिंह ने संभाली। निर्देशन सहयोग व संगीत शुभी मेहरोत्रा का था। लेखक पंकज सोनी एवं निर्देशक प्रवीन अरोड़ा थे।
कार्यक्रम के आरंभ में वरिष्ठ रंगकर्मी विश्व दीपक त्रिखा ने दर्शकों को फेस्टिवल की जानकारी दी और विशिष्ठ अतिथि डॉ. आनंद शर्मा व कलाकारों का स्वागत किया। मंच संचालन सुजाता ने किया। सप्तक के सचिव अविनाश सैनी ने बताया कि नाटकों का आयोजन संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से किया गया।

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