'ऐ मौत तूने मुझे ज़मींदार कर दिया', राहत इंदौरी के वो 25 शेर जो यादगार हो गए

11 Aug, 2020 | Uttar Pardesh | धर्मेन्द्र शर्मा

'ऐ मौत तूने मुझे ज़मींदार कर दिया', राहत इंदौरी के वो 25 शेर जो यादगार हो गए

मोहब्बत और बगावत की शायरी से युवाओं के दिल को जीतने वाले मशहूर शायर राहत इंदौरी अब हमारे बीच नहीं रहे. मंगलवार की सुबह ही उनकी कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आने की सूचना सामने आई थी. दोपहर होते-होते उन्हें दिल का दौरा पड़ा और निधन हो गया. लॉकडाउन से पहले तक राहत इंदौरी कई मुशायरों में शायरी करते रहे. उनकी कई पंक्तियां आज भी युवाओं के दिल को छू जाती हैं और इतिहास में दर्ज हो गई हैं.

राहत इंदौरी ने अपनी शायरी और गजलों से कई सरकारों को चेताया है तो बॉलीवुड की कई फिल्मों में गाने भी लिखे हैं. आज जब राहत इंदौरी इस दुनिया में नहीं हैं, तो उन्हें याद करते हुए उनके कुछ वो शेर पढ़िए जो हमेशा चर्चा में रहे...

1. एक ही नदी के हैं ये दो किनारे दोस्तों
दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो

2. बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए
मैं पीना चाहता हूं पिला देनी चाहिए

3. वो चाहता था कि कासा ख़रीद ले मेरा
मैं उस के ताज की क़ीमत लगा के लौट आया

4. अफवाह थी की मेरी तबियत ख़राब है
लोगों ने पूछ पूछ के बीमार कर दिया

5. सभी का खून है शामिल यहां की मिट्टी में
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है.


6. अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए
कितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए

7. दो गज सही मगर ये मेरी मिल्कियत तो है,
ऐ मौत तूने मुझको जमींदार कर दिया

8. मैं जानता हूं दुश्मन भी कम नहीं,
लेकिन हमारी तरह हथेली पर जान थोड़ी है