मान्यताओं से खिलवाड़, डीजल डालकर कोरोना मृतकों को जला रहा निगम

15 Sep, 2020 | Haryana | garima times

करनाल। हिंदू-रीति के अनुसार अंतिम संस्कार लकड़ी, रॉल, धूप, घी आदि से किया जाता है, लेकिन हरियाणा के करनाल जिले के नगर निगम ने इन मान्यताओं के मायने ही बदल दिए हैं। निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, कोरोना से मृतकों का अंतिम संस्कार डीजल से किया जा रहा है। नगर निगम की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यहां दाह संस्कार की परंपरा का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। 

परिजनों का आरोप है कि शमशान घाट पर डीजल डालकर कोरोना मृतकों की चिताएं जलाई जा रही हैं। उनकी राख (फूल) के ऊपर से एंबुलेंस निकाली जा रहीं हैं। इसे सीधे तौर पर सनातनी दाह संस्कार परंपरा का अपमान बताकर कई समाजसेवियों ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए उसकी उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। 

बलड़ी शमशान घाट पर कोरोना संक्रमण से मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए सुबह यहां तीन शव लाए गए। वहां उनके परिजन भी मौजूद थे, जिन्होंने कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में उपचार और नगर निगम द्वारा कराए जा रहे दाह संस्कार की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं।

एक मृतक की बेटी ने आरोप लगाए है कि पिता की डॉक्टरों की लापरवाही के कारण मृत्यु हो गई। इसके बाद आज सुबह जब बलड़ी शमशान पहुंचे तो यहां नगर निगम की कोई व्यवस्था नहीं थी। यहां पहुंचते ही कर्मचारी ने डीजल लाने को कहा। उन्हें नहीं मालूम था कि डीजल का क्या करेंगे, जबकि वह तो दाह संस्कार के लिए सामग्री लेकर पहुंची थी। आरोप है कि कर्मचारियों ने चिता पर कुछ लकड़ी रखीं और डीजल डालकर आग लगा दी।

आरोप है कि जब शव श्मशान घाट पहुंचे तो वहां कुत्ते घूमते मिले। अंतिम संस्कार के लिए देशी घी व अन्य सामग्री लाए लेकिन यहां स्टाफ ने सबसे पहले डीजल की मांग की। आनन-फानन में जैसे तैसे शव के ऊपर कुछ लकड़ी रखकर डीजल डालकर आग लगा दी। बहुत कहने पर दो परिजनों को पीपीई किट दी तो वह शव के पास गए। यहां शव की राख (फूल) पड़ी थी, उसके ऊपर से वाहन गुजर रहे हैं, स्टाफ जूते पहनकर निकलता है। घटना की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। 

करनाल जन सेवा दल के प्रधान चरणजीत बाली ने कहा कि यह तो अमानवीयता की हद है, सरकार कोरोना के मृतकों के शवों का दाह संस्कार कराने में अक्षम है तो जनसेवा दल के अपना आशियाना को यह जिम्मेदारी सौंप दें। हम, लोग अपने परिजनों की तरह सभी शवों का रीति रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार करेंगे। शव को डीजल डालकर जलाना सनातन दाह संस्कार परंपरा का अपमान है। शव को डीजल डालकर जलाना, अस्थियों व चिता की राख के ऊपर से गाड़ियों का गुजरना, स्टाफ का जूते पहनकर फूल रौंदना, उनके ऊपर से पशुओं का घूमना, शमशान घाट पर पहली डिमांड डीजल होना, आखिर यह सब क्या है ? ऐसा अपमान तो शायद ही किसी ने देखा और सुना होगा।

वहीँ करनाल नगर निगम के सफाई निरीक्षक प्रवेश कुमार का कहना है कि यहां घासफूस तो है नहीं, इसलिए चिता की लकड़ियों पर डीजल डालना पड़ता है लेकिन शव के ऊपर नहीं डालते हैं। नगर निगम से पांच क्विंटल लकड़ी, दो लीटर डीजल मिलता है। किसी से डीजल नहीं मंगाते हैं। पीपीई किट व मास्क, ग्लब्स आदि रेडक्रास से मिलते हैं। स्थान की कमी है, सिर्फ पांच दाह संस्कार स्थल है लेकिन शव कई आते हैं, पिछले 12 दिनों में 41 शव आ चुके हैं। फूल बीनने की परंपरा तीन या पांच दिन के बाद होती है, इसलिए बाहर खुले में चिता लगानी पड़ती है।