#मनीषा की हत्या या आत्महत्या ?

23 Nov, 2020 | Rohtak |

रोहतक । सुनारियां कलां स्थित 'पुलिस ट्रेनिंग कैंप' (पीटीसी) में पिछली 14 सितंबर को मरी पाई गई 30 वर्षीया युवती मनीषा की मौत हत्या थी या आत्महत्या , इसे लेकर मामला एक बार फिर गर्म हो गया है । 

इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के चर्चित वकील डॉ. एपी सिंह ने आज रोहतक में बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके इस मामले के कई पहुलूओं पर गहराई से रोशनी डाली और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किये ।

गौरतलब है कि दिल्ली के नांगलोई क्षेत्र निवासी सुंदर लाल की बेटी मनीषा की शादी लगभग नौ वर्ष पहले 27/11/2011 को रोहतक जिला के गांव किलोई के निवासी विकास से हुई थी । विकास हरियाणा पुलिस में सिपाही है और पिछले तीन वर्ष से पुलिस ट्रेनिग  कैंप परिसर में बने सरकारी क्वार्टर में रह रहा है ।

मनीषा की लाश 14/09/2014 को सुनारिया कलां स्थित ट्रैनिंग कैंप में पुलिस कर्मचारी विकास के सरकारी आवास में पंखे से लटकती हुई मिली थी । मनीषा के ससुराल वालों का कहना है कि उसने पंखे से लटक कर खुदकशी कर ली , जबकि मनीषा के पिता सुंदरलाल कहते हैं कि मनीषा को दहेज के लिए उसके ससुराल वालों ने साजिश करके मारा है । 

सुंदर लाल कहते हैं कि शादी के मात्र छह महीने बाद ही ससुराल वालों द्वारा मनीषा को दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया गया था और मनीषा के पति विकास को पुलिस में भर्ती कराने के नाम पर विकास के पिता रतन सिंह और विकास की मां ने उनसे चार लाख रूपये ऐंठ लिये थे । इसके बाद विकास पुलिस में भर्ती तो हो गया था , लेकिन उसकी व उसके परिवार की मांगे लगातार बढ़ती ही चलीं गई । 

बकौल सुंदर लाल उन्होंने अपनी बेटी को खुशहाल देखने के लिए पिछले साल एक नवंबर को भी मनीषा के ससुराल वालों को चार लाख रूपये की मांग पूरी की ।

उनका आरोप है कि पिछले नौ साल में कम से कम आधा दर्जन बार उनकी बेटी को दहेज के लिए मारपीट कर के घर से निकाल दिया गया और इस संबंध में पुलिस को शिकायतें भी की गईं  , लेकिन हर बार पंचायत में माफी मांग कर विकास का परिवार कार्रवाई से बचता रहा ।

सुंदर लाल के केस की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील एपी सिंह का कहना है कि मौकाये वारदात पर मिले सबूतों , फोटो तथा वहां सूट की गई वीडियोज से साबित होता है कि मनीषा ने खुदकशी नहीं की बल्कि उसे साजिश करके मारा गया है । एपी सिंह ने घटनास्थल के फोटोग्राफस और वीडियोज पत्रकारों को दिखाये और साबित करने की कोशिश की पुलिस ने जांच में कहां कहां चूक की है ?

शिकायतकर्ता सुंदरलाल और उनके वकील एपी सिंह का आरोप है कि संबधित थाना पुलिस अपने महकमें के पुलिस कर्मचारी को बचाने के लिए पक्षपात कर रही है और ठोस सबूतों को अनदेखा कर उन्हें हलके में ले रही है । 

दूसरी तरफ मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच में किसी तरह का पक्षपात करने का सवाल ही नहीं है । बाकायदा फोरेंसिक अधिकारियों द्वारा भी मौका मुआयना किया गया था और ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला जो हत्या की तरफ इशारा करता हो ।

देश के चोटी के वकील एपी सिंह के केस में दखलंदाज होने से लगता है कि अब इस मामले में कोई नया मोड़ आ सकता है और मामला तूल पकड़ सकता है ।