अब हरियाणा में प्लाज्मा थैरपी से होगा कोरोना का इलाज, आईसीएमआर से मिली मंजूरी

29 Jun, 2020 | Haryana | garima times

चंडीगढ़।  कोरोना संक्रमितों के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं। इसे रोकने के लिए दुनिया के कई देशों में वैक्सीन की खोज की जा रही है, लेकिन अभी तक कामयाबी नहीं मिली है। कोरोना पर काबू पाने के लिए प्लाज्मा थेरेपी से देश में इलाज सफल हुआ है। हरियाणा सरकार अब कोरोना के गंभीर मामलों से निपटने को प्लाज्मा थेरेपी का सहारा लेगी। इसके लिए प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों को चुना गया है। इसको लेकर आईसीएमआर ने मंजूरी दे दी है। इस संदर्भ में हरियाणा के स्वास्थ्य एवं गृह मंत्री अनिल विज ने सोमवार को ट्वीट करके जानकारी दी। बता दें कि गंभीर मरीजों का इलाज इस थैरपी से किया जा रहा है, जिसका लाभ भी मिल रहा है। इससे पहले हरियाणा के कुछ जिलों में प्लाज्मा थैरपी से इलाज हो रहा था।

क्या है प्लाज्मा थेरेपी

प्लाज्मा थेरेपी में ऐसे लोगों से रक्त लिया जाएगा जो कोरोना संक्रमण से पूरी तरह ठीक हो चुके हैं। इस थैरपी के कोरोना वायरस के केस में अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। कोरोना से ठीक हुए उन्हीं लोगों का सैंपल लिया जाएगा, जिन्हें हाइपरटेंशन, मधुमेह व कोई अन्य बीमारियां नहीं होगी। एक व्यक्ति से 300 से 500 मिलीलीटर प्लाज्मा लिया जाएगा। ऐसे व्यक्ति के रक्त से प्लाज्मा लेकर नए मरीज को देने पर डोनर के रक्त में मौजूद एंटीबॉडी मरीज के शरीर में मौजूद वायरस को न्यूट्रलाइज कर देगी। इस विधि में आधुनिक टेक्नोलॉजी युक्त मशीन से डोनर के शरीर में मौजूद खून से प्लाज्मा बाहर आता है और रेड ब्लड सेल (आरबीसी) व व्हाइट ब्लड सेल (डब्ल्यूबीसी) मरीज के शरीर में वापस चले जाते हैं, जिसे प्लाज्मा फेरेसिस कहा जाता है।  प्लाज्मा थेरेपी को पहले भी कई गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए प्रयोग में लाया जा चुका है। प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल 2002 में सार्स वायरस से निपटने व 2009 में एच1एन1 इंफेक्शन रोकने और 2014 में इबोला जैसे खतरनाक वायरस को मिटाने के लिए भी किया जा चुका है। प्लाज्मा थेरेपी कराने का सबसे बड़ा लाभ रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना है। थेरेपी के बाद संक्रमित की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है जिससे ठीक होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है।

 रैपिड एंटीजन टेस्ट से हो रही जांच

हरियाणा के गुड़गांव और फरीदाबाद में बढ़ते मामलों के कारण रैपिड एंटीजन टेस्ट से जांच हो रही है। इस तकनीक से रिजल्ट 15 से 30 मिनट के अंदर आ जाता है। इस तकनीक से पहले गुड़गांव में टेस्टिंग शुरू की गई थी अब सोमवार को फरीदाबाद में शुरू की गई है।