बीच रास्ते जली बस, करंट की चपेट में आकर लगी आग, 6 की दर्दनाक मौत, 36 घायल 

18 Jan, 2021 | Rajasthan | garima times

जयपुर।  राजस्थान के जालोर में भीषण हादसे में कई यात्रियों की मौत के बाद सनसनी फ़ैल गयी। जानकारी के मुताबिक, यात्रियों से भरी बस बिजली की तार की चपेट में आ गयी, जिसके बाद उसमे आग लग गयी। इस दौरान बस में सवार यात्रियों में अफरातफरी मच गयी, पूरी बस आग की लपटों में घिर गयी और देखते ही देखते 6 यात्रियों की मौत हो गयी।

मामला जालोर के महेशपुरा इलाके का है, यहां यात्रियों से भरी हुई दो बसें रास्ता भटक गयी और एक गांव में पहुंच गई। गाँव के रास्ते में बिजली के तार झूलते देख ड्राइवर ने बस रोक दी और बस कंडक्टर बस की छत पर चढ़कर डंडे की मदद से बिजली के तार को हटाने लगा, ताकि बस निकल सके। हालाँकि ऐसा करना मुसीबत का सबब बन गया, जब डंडे से बिजली का तार झटक कर कंडक्टर के गले में अटक गया।

जिससे कंडक्टर और बस में करंट दौड़ गया। कंडक्टर बिजली के चलते झुलस गया, वहीं बस में करंट लगने से आग लग गयी। देखते ही देखते पूरी बस आग की चपेट में आ गयी। हादसे में छह यात्रियों की मौत हो गई, वहीं 36 अन्य यात्री गंभीर रूप से झुलस गए। 

इनमें से ज्यादातर जालोर जिला अस्पताल में भर्ती हैं। कुछ लोगों की हालत गंभीर होने के चलते उन्हें जोधपुर रैफर कर दिया गया। सभी लोग जैन समाज के हैं, जो नाकोड़ा तीर्थ से दर्शन करने के बाद अजमेर और ब्यावर लौट रहे थे। हादसा जालोर जिले से 7 किमी दूर महेशपुरा गांव में हुआ। जैन श्रद्धालु 2 बसों में ब्यावर से रवाना हुए थे। सभी जालाेर जिले के जैन मंदिर में दर्शन करने पहुंचे। दर्शनों के बाद लौटते समय रास्ता भटककर महेशपुरा गांव पहुंच गए। गांव की संकरी गलियों से गुजरते समय एक बस 11 केवी लाइन की चपेट में आ गई और करंट फैलने से बस में आग लग गई। 

ब्यावर निवासी मृतक चांददेवी व सोनल मां बेटी थे। शाहपुरा मोहल्ला, मालियों की चौपड ब्यावर में रह रहे मूलत: उदयपुर निवासी अनिल जैन की 44 वर्षीय पत्नी सोनल जैन का पीहर ब्यावर में ही है। सुराणा नगर ब्यावर निवासी गजराजसिंह चीपड की चांददेवी (65) की भी हादसे में मौत हो गई। दोनों मां बेटी की अर्थी सुराणा नगर निवास स्थान से निकली। दोनों का अन्तिम संस्कार कर दिया गया है।

लोढा भवन, गंज अजमेर के रहने वाले 58 वर्षीय धर्मीचन्द जैन ड्राइवर का काम करते थे और वे अविवाहित थे। वे उनके भाई व भतीजे के पास ही रहते थे। उनके माता पिता का पहले ही देहान्त हो चुका है। वहीं मृतका सुरभि जैन (25) ब्यावर के मेवाडी गेट, शाही का तकिया गली की रहने वाली थी। बताया जाता है कि इसकी शादी करीब पौने दो साल पहले हुई थी और कोई संतान नहीं है।

चांददेवी व सोनल जैन रिश्ते में मां बेटी थे। सोनल की शादी उदयपुर में हुई थी लेकिन वह अपने पति के साथ ब्यावर में रह रही थी। ऐसे में दोनों की अर्थी सुराणा नगर से ही उठी। दोनों का अन्तिम संस्कार कर दिया गया है। इसमें से कुछ ऐसे भाग्यशाली लोग भी थे जो समय रहते कांच तोड़ बस से बाहर निकलने में सफल रहे। इनमें से एक हैं चेन्नई निवासी दर्शन कोठारी। दर्शन ने संकट के दौरान हौसला नहीं खोया और सूझबूझ से काम लिया। यही कारण रहा कि 21 साल का दर्शन न केवल खुद की जान बचाने में सफल रहा बल्कि अपनी दो बहनों को भी जलती बस से सकुशल बाहर निकाल लाया। दर्शन ने बताया कि हम सभी बस में बैठे थे। कोई झपकी ले रहा था तो कोई आपस में बातें कर रहा था। इस बीच जोर से आवाज आई। मैं पीछे की तरफ खिड़की के पास ही बैठा था। मैंने बाहर देखा टायर के पास आग लग रही थी। इस पर मैं जोर से चिल्लाया... बस में आग लग गई। इसके बाद बस में अफरा-तफरी मच गई। सभी लोग बाहर निकलने की जल्दबाजी में गेट की तरफ लपके।

इसी दौरान बिजली के तार का दूसरा टुकड़ा गिरकर गेट से टकराया। ऐसे में गेट की तरफ करंट आना शुरू हो गया। जो भी गेट की तरफ बढ़ा उसे जोरदार झटके लगे और वह करंट की चपेट में आकर वहीं गिर गया। एक-एक करके कई लोगों की मौत हो गई। कुछ ही सेकंड्स में बस में अफरातफरी मच गई। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था। मैं बस में सबसे पीछे बैठा था। सब आगे बढ़े और उन्हें करंट की चपेट में आता देख मैंने सबसे पीछे के कांच को तोड़ दिया और बाहर कूद अपनी जान बचाई। इसके बाद मैंने वहां से अपनी दो बहनों को बाहर निकाल लिया। तब तक बस में आग काफी फैल चुकी थी।