अशोक तंवर करेंगे नए मोर्चे का करेंगे ऐलान, यह दिन हुआ निश्चित 

23 Feb, 2021 | Haryana | garima times

नई दिल्ली।  करीब डेढ़ साल से राजनीतिक वनवास झेल रहे हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर अब अपना नया मोर्चा बनाने वाले हैं। 25 फरवरी को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में अशोक तंवर इसका ऐलान करेंगे। तंवर के करीबी सूत्रों के मुताबिक देश के सभी महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर यह मोर्चा सक्रिय रहेगा। 

दरअसल पिछले करीब 17 माह से फ्रीलांस राजनीति कर रहे कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डा. अशोक तंवर की सियासत से फ्रीलांस का टैग अब हटने जा रहा है। सिरसा से पूर्व सांसद और युवा कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. अशोक तंवर ने अब खुद का एक सियासी फ्रंट बनाने का निर्णय ले ही लिया है। सूत्रों के अनुसार 25 फरवरी को वह अपने नए मोर्चे का ऐलान करेंगे और इसको लेकर वे 25 से अधिक शहरों में वैबीनार के माध्यम से अपने समर्थकों के साथ जुड़ेंगे और मोर्चे के नाम की भी घोषणा करेंगे। 25 फरवरी को दिल्ली के  कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में इस संबंध में एक मुख्य कार्यक्रम का आयोजन होगा जिसमें स्वयं अशोक तंवर मौजूद रहेंगे। इसके साथ ही चंडीगढ़, पंजाब, उत्तराखंड व उत्तरप्रदेश में कार्यक्रम होंगे। दिल्ली में मुख्य कार्यक्रम करने के पीछे उनकी राष्ट्रीय राजनीति में नए मोर्चा की मौजूदगी का अहसास करवाने की सोच है।

गौरतलब है कि डा. अशोक तंवर ने छात्र नेता के रूप में सियासत में दस्तक दी। वे कांग्रेस के विद्यार्थी संगठन एनएसयूआई के सचिव और अध्यक्ष रहे। बाद में वे युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बने। साल 2009 में उन्होंने सिरसा लोकसभा सीट से इनैलो के डा. सीताराम को करीब 35001 वोटों से हराया। 2014 और 2019 का लोकसभा चुनाव वे हार गए। फरवरी 2014 में उन्हें हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया।  2019 के विधानसभा चुनावों में अशोक तंवर ने उनके समर्थकों को टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर न केवल कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पद से त्याग पत्र दे दिया था, बल्कि कांग्रेस को ही अलविदा कर दिया था। अपना फायदा देखने की बजाए समर्थकों के लिए कुर्बानी देने वाले अशोक तंवर ने हरियाणा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को हराने में अहम रोल अदा किया था। इसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि अशोक तंवर नई पार्टी का गठन करेंगे। लेकिन अशोक तंवर अभी तक सार्वजनिक मंचों पर अलग पार्टी बनाने की बात से इंकार करते रहे हैं।

अब नया मोर्चा बनाकर वह राष्ट्रीय राजनीति के अनुभव, अखिल भारतीय कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव, युवा कांग्रेस व एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते बने अपने संबंधों को नए सिरे से तराशने जा रहे हैं। हरियाणा कांग्रेस के वह 5 साल 8 महीने तक प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। उनका फोकस केवल हरियाणा न होकर राष्ट्रीय राजनीति पर रहेगा। इस मोर्चा के मैदान में उतरने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा होने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। विशेष बात ये भी है कि यूं तो इस मोर्चे को सामाजिक मोर्चे का नाम दिया जाएगा मगर बाद में इसे राजनीतिक दल के रूप में परिवर्तित कर दिया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक अशोक तंवर द्वारा बनाए जा रहे इस मोर्चे का मकसद राजनीति के साथ-साथ समाज सेवा है। इसके साथ ही जनता के लिए जनता के द्वारा बनाया जाने वाला यह मोर्चा होगा। इस मोर्चे में अच्छी छवि के लोगों को जोड़ा जा रहा है। ऐसा पहली बार होगा, जिसमें बड़े घरानों से जुड़े राजनेताओं की बजाए आम जनता के लोग होंगे। 25 फरवरी को मोर्चा की स्थापना कर दी जाएगी। इसके नाम की घोषणा भी 25 फरवरी को ही होगी। तंवर समर्थकों का कहना है कि कोविड-19 को देखते हुए फैसला किया गया है कि ज्यादा भीड़ एक जगह न बुलाई जाए, इसलिए दिल्ली-चंडीगढ़ के साथ साथ हरियाणा के कुछ जिलों व अन्य राज्यों में भी उसी दिन होने वाले कार्यक्रमों से अशोक तंवर लाइव जुड़ेंगे और उनसे मोर्चे की रूपरेखा व नामकरण को लेकर विचार करने के बाद मोर्चे का ऐलान करेंगे।

हरियाणा की राजनीति में अशोक तंवर की पहचान युवा दलित नेता की है। आपको बता दें कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा के दबाव में बीते विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तंवर को हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाया गया था और कुमारी सैलजा को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष पद सौंपा गया था। इसके बाद अशोक तंवर ने पार्टी छोड़ने का एलान कर दिया था। करीब डेढ़ साल बाद नया मोर्चा बना कर तंवर दोबारा अपने पैर जमाने की कोशिश में हैं। 

गौरतलब है कि हरियाणा के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद अशोक तंवर ने जेजेपी को अपना समर्थन दिया था और जब नतीजे आए थे तो जननायक जनता पार्टी को 12 सीटें ही मिली थीं। हालांकि पार्टी हरियाणा के किंग मेकर के तौर पर उभरी।